Pujya Swamiji recieves Parliament of Worlds Religions Ahimsa Award

Pujya Swamiji receives prestigious Ahimsa award by Parliament of World Religions

TORONTO: Today was a moment of historic pride for India when Pujya Swami Chidanand Saraswatiji was awarded the special Ahimsa award by the Parliament of World Religions in Toronto. This evening, Dr. Robert P. Sellers, Chair of Parliament of World Religions, Dr Kirit Daftary, Trustee and representative of the Jain religion, Parliament of World Religions, honoured HH Pujya Swami Chidanand Saraswatiji – Muniji​ for his exceptional contributions that enhance and strengthen the interfaith community through non-violence, his unparalleled service to humanity, his great example of peace and compassion in action. The award has been sponsored by Jain communities around the world.

H.H. Swami Chidanand Saraswatiji, one of India’s most renowned leaders, is President of Parmarth Niketan, one of India’s largest interfaith spiritual institutions and co-founder of Global Interfaith WASH Alliance, the first alliance of religious leaders working for water, sanitation and hygiene, launched by UNICEF at their World Headquarters in New York City during the time of the General Assembly of the United Nations,. He also is founder of Ganga Action Parivar, supporting and dedicated to the Clean Ganga Movement, Divine Shakti Foundation, educating and empowering women and girls, and India Heritage Research Foundation, which conceived and published the historic Encyclopedia of Hinduism and built three historic ashrams in the sacred land of Kailash Mansarovar.

The Parliament of Religions, founded in 1893 when Swami Vivekananda came and delivered his historic address has gathered approximately 10,000 people from 50 different religious lineages and from 80 regions of the world at the Toronto Metro Convention center for their 7th Parliament.

Sadhvi Bhagawati Saraswati​, President of Divine Shakti Foundation​ and Secretary-General of Global Interfaith WASH Alliance, disciple of Pujya Swamiji’s spoke about Pujya Swamiji as an embodiment of Ahimsa. She said, “Ahimsa is not simply an absence of violence. It is a fullness of peace, a fullness of embracing and acting from the truth of our highest united humanity. Pujya Swamiji sees not only bombs, guns and armed conflict as violence. He also sees starving children, homeless orphans, women without access to clean water or toilets, death by diarrhea, polluted rivers and felled trees as violence. His life has been dedicated to eradicating all forms of violence, not only armed conflict, but also universal access to safe and sufficient water, access to health care and education. Wherever Pujya Swamiji goes He embodies ahimsa, whether picking up trash on the banks of a river or picking up people’s spirits, whether building schools, women’s centers, hospitals and sewage treatment plants or building bridges between people in conflict.”

पार्लियामेंट टोरंटो, विश्व धर्म संसद द्वारा आयोजित ऐतिहासिक कार्यक्रम
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को अन्तर्राष्ट्रीय विशिष्ट पुरस्कार ’’अहिंसा पुरस्कार’’ से किया सम्मानित

ऋषिकेश/ टोरंटो 6 नवम्बर। आज भारत के लिये ऐतिहासिक और गौरव का क्षण है जब विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को ’’अहिंसा पुरस्कार’’ से सम्मानित किया गया। यह विशेष कार्यक्रम पार्लियामंेट टोरंटो, विश्व धर्म संसद द्वारा आयोजित किया गया।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता एवं ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को उनके असाधारण योगदान, अद्वितीय सेवा, इंटरफेथ को बढ़ावा देने, इंटरफेथ संबंधों को मजबूत करने, विश्व स्तर पर शान्ति और मानवता के लिये किये जा रहे अद्वितीय योगदान के लिये उन्हे पुरस्कार प्रदान किया गया।

विश्व धर्म संसद के अध्यक्ष, डाॅ राॅबर्ट पी सेलर्स, डाॅ किरीट दफ्तररी ट्रस्टी एवं जैन धर्म प्रतिनिधि द्वारा ’अहिंसा पुरस्कार’ स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को प्रदान किया गया।

भारत के प्रसिद्व आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज विश्व स्तर पर जल, स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में अद्भुत कार्य कर रहे है। स्वामी जी महाराज के मार्गदर्शन में विश्व स्तर पर कार्य करने वाला जीवा संगठन पहला ऐसा गठबंधन है जो विभिन्न धर्मो के धर्मगुरू को एक मंच पर लाकर विलक्षण कार्य कर रहा है। स्वामी जी महाराज गंगा एक्शन परिवार के माध्यम से स्वच्छ गंगा आंदोलन, डिवाइन शक्ति फाउंडेशन के माध्यम से महिलाओं एवं लड़कियों को शिक्षित और सशक्त बनाने तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में तथा उनके मार्गदर्शन में हिन्दू धर्म विश्वकोश के रूप में अमूल्य गं्रथ का प्रकाशन एक ऐतिहासिक कार्य है।

पार्लियामेंट टोरंटो, विश्व धर्म संसद द्वारा आयोजित ऐतिहासिक कार्यक्रम में विश्व के 50 विभिन्न धर्मो के 80 धार्मिक क्षेत्रों के लगभग दस हजार लोगों ने सहभाग किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि सत्य और अहिंसा की व्यवहारिक बुनियाद रखना ही सच्ची साधना है।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव स्वामी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि ’’अहिंसा का तात्पर्य हिंसा की अनुपस्थिति नहीं है। शान्ति की पूर्णता सभी को गले लगाने और मानवता के लिये एकजुट होकर कार्य करना है। उन्होेने कहा कि स्वामी जी के विचार से हिंसा का अर्थ केवल बम, बंदूके, सशस्त्र संघर्ष ही नहीं बल्कि सार्वभौमिक सतत विकास अर्थात सभी को सुरक्षित, स्वच्छ और पर्याप्त जल, स्वास्थ्य की देखभाल, शौचालय की सुविधायें शिक्षा की पहंुच सभी भूखे, बेघर और अनाथ बच्चों को मौलिक जरूरतें प्रदान करना ही उन लोगों के लिये अहिंसा युक्त व्यवहार है। साध्वी जी ने कहा कि स्वामी जी महाराज जहां भी जाते है चाहे वह नदियों का तट हो या कचरे और प्रदूषण से युक्त भूमि वहा वे स्वयं कचरा-कूडा उठाकर लोगों को स्वच्छता का संदेश देते हैेेे। उन्होने बच्चों और महिलाओं के लिये शिक्षा केन्द, अस्पताल, और सीवेज उपचार संयत्रा एवं तकनीकी जैसे अनेेेेक ऐतिहासिक कार्य सम्पन्न किये है।’’

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