विश्व शान्ति दिवस World Peace Day

विश्व शान्ति दिवस
परमार्थ निकेतन में अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति दिवस पर विशेष प्रार्थना का आयोजन
युद्ध से बुद्ध की ओर-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

Pujya Swamiji and Pujya Madhavpriyadas Swamiji pledge to not only pray but to work for peace in our communities, our country and our world. They emphasize the need for climate action, freedom from plastic and pollution as a critical path to sustain this peace.

21 सितम्बर। विश्व शान्ति दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में सर्वत्र शान्ति हेतु विशेष प्रार्थना का आयोजन किया गया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के सान्निध्य में परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों और आचार्यों ने विश्व शान्ति हेतु प्रार्थना की।

अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति दिवस पर विशेष रूप से स्वामी नारायण गुरूकुल अहमदाबाद से स्वामी माधवप्रिय दास जी पधारे। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों और आचार्यो ने शंख ध्वनि और पुष्पवर्षा कर स्वामी जी का अभिनन्दन किया। विश्व शान्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, अभावग्रस्त और जरूरतमंद लोगों के लिये निरंतर चिंतन करने वाले और उसे चर्या में बदलने वाले स्वामी माधवप्रिय दास जी ने भी स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के साथ विश्व शान्ति के लिये प्रार्थना की।

21 सितम्बर का दिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व शान्ति के लिये समर्पित किया गया है विशेष तौर पर युद्ध और हिंसा की अनुपस्थिति के रूप में इसे मनाया जाता है। इस दिवस को पहली बार 1981 में मनाया गया था तथा 2013 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा शान्ति शिक्षा के लिये इस दिन को समर्पित किया गया था। वर्ष 2019 को ’’क्लाइमेट एक्शन फाॅर पीस’’ के रूप में बनाया जा रहा है। इसमें जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जल सुरक्षा जैसे अनेक विषयों पर कार्य किया जायेंगा।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जब हम वैश्विक स्तर पर शान्ति की बात करते हैं तब हमारा आशय हिंसा को रोकने मात्र से होता है परन्तु हिंसा को रोकने से काम नहीं चलने वाला बल्कि हिंसा को समाप्त करने के लिये सर्वत्र शान्ति की स्थापना करनी होगी। वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और क्लाइमेंट चेंज के कारण जो समस्यायें उत्पन्न हो रही हंै उस स्थिति मंे हम वैश्विक शान्ति की कल्पना नहीं कर सकते। उन्होने कहा कि प्रकृति जन्य समस्याओं का प्रमुख कारण है मनुष्य के द्वारा प्रकृति के प्रति की जा रही कर्तव्य विमुखता। प्रकृति और पर्यावरण का निरंतर हृास हो रहा है, जिससे मानव और अन्य प्राणियों के लिये संकट उत्पन्न हो रहा है। कहीं न कहीं यह संकट मनुष्य की कर्तव्य विमुखता के कारण उत्पन्न हुआ है। मनुस्मृति में कहा गया है कि ’’धृति क्षमा दमोऽस्तेयं, शौचं इन्द्रियनिग्रहः। धीर्विद्या सत्यं अक्रोधो, दशकं धर्म लक्षणम्।’’ स्वामी जी ने कहा कि जीवन में हम अनेक बार कत्र्तव्यों की अनदेखी करते हंै, हम सोचते हैं जो अधिकार हैं वह हमारे और जो भी कत्र्तव्य हंै वह सिस्टम के, इसी सोच का परिणाम है आज हमारे सामने जल, वायु और जीवन का संकट उत्पन्न हो गया है। अगर हम अपने चारों ओर देखें तो प्रकृति, पर्यावरण और ब्रह्माण्ड भी नियमों से बंधे हंै और अपना कत्र्तव्य करते हंै अगर मनुष्य भी अपने अधिकारों से ज्यादा अपने कर्तव्य को महत्व देना शुरू करे तो सर्वत्र शान्ति ही शान्ति होगी।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने परमार्थ गुरूकुल के सभी ऋषिकुमारों को प्रकृति, पर्यावरण और जल स्रोत्रों के प्रति सजग और संवेदनशील रहने का संकल्प कराया।

परमार्थ गंगा तट पर होने वाली आज की गंगा आरती वैश्विक शान्ति हेतु समर्पित की गयी तथा विश्व शान्ति हेतु विशेष आहुतियां समर्पित की गयी।

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